Sunday, 11 August 2013

खामोशियाँ

 तेरी ख़ामोशी हमारी कमजोरी हैं,
कह नहीं पाना हमारी मज़बूरी हैं,
क्यों नहीं समझते हमारी खामोशियो को,
खामोशियो को जुबा देना बहुत जरुरी हैं

हम वो नहीं जो दिल तोड़ देंगे,
थाम कर हाथ साथ छोड़ देंगे,
हम दोस्ती करते हैं पानी और मछली की तरह,
जुदा करना चाहे कोई तो हम दम तोड़ देंगे …

 लोग कहते हैं किसी एक के चले जाने से जिन्दगी अधूरी नहीं होती,
लेकिन लाखों के मिल जाने से उस एक की कमी पूरी नहीं होती है

 हमारी किसी बात से खफा मत होना,
नादानी से हमारी नाराज़ मत होना.
पहली बार चाहा है हमने किसी को इतना,
चाह कर भी कभी हमसे दूर मत होना..

 दुआ करते हैं हम सर झुका के,
आप अपनी मंज़िल को पाए.
अगर आपकी राहों मे कभी अंधेरा आए,
तो रोशनी के लिए खुदा हमको जलाए…

  मुद्दत के बाद उसनें की , जो लुत्‍फ की निगाह
दिल खुश तो हो गया, मगर आंसू निकल पड़े ।।

No comments:

Post a Comment