कब्र से मिटटी उठा ले गया कोई,
इसी बहाने हमें छू गया कोई,
तन्हाई और अँधेरे में खुश थे हम,
अब फिर इंतज़ार की वजह दे गया कोई||
ज़रा सी रंजिश पे ना छोड़ना दामन वफ़ा का कभी,
उम्रें बीत जाती हैं, दिल का रिश्ता बनाने में||
वक्त के पन्ने पलटकर
फ़िर वो हसीं लम्हे जीने को दिल चाहता है
कभी मुशाकराते थे सभी दोस्त मिलकर
अब उन्हें साथ देखने को दिल तरस जाता है
ज़िन्दगी का हर राज़ तन्हाई में पा लिया,
जिस का भी गम मिला अपना बना लिया|
अपना दर्द सुनने को जब कोई न मिला,
तो रखा आइना और खुद को ही सुना लिया||
ज़रा नाज़ुक है दिल, अहिस्ता अहिस्ता संभालो|
है मिटटी का खिलौना, यूँ न हो कि तोड़ डालो||
आइने से अहिस्ता से
नज़रों से परछाई से
अपने आप को बहुत बार गुम पाया हैं
आईने में आज खुद को देख ये गुमान होने लगा,
क्या ये मैं ही हूँ या पहचान खोने लगा,
दिल तड़पता था अंदर ही अंदर, अँधेरे में छुपकर रोता था,
तब जाके जाना दिल लगाने का क्या अंजाम होता था...
याद आती नहीं उनको मेरी, कोई गम नहीं,
याद करते है कितना, उनको कोई भरम नहीं,
अब तो हाल-इ-दिल पूछना भी, न-मुनासिब समझते है वो,
लगता है जैसे, उनको अपना कोई गम नहीं...
मुझको तन्हाई में भी, लोगो की आवाज़ सुनाई देती है,
मुझको अंधेरों में भी, खुद की परछाई दिखाई देती है,
बदल रहा हूँ मैं शायद, यह एहसास होने लगा है,
मुझको मेरी राहों में, तन्हाई दिखाई देती है...
आपका खुश रहना ही आपके
दुश्मनो के लिय
सबसे बडी सजा है
इसी बहाने हमें छू गया कोई,
तन्हाई और अँधेरे में खुश थे हम,
अब फिर इंतज़ार की वजह दे गया कोई||
ज़रा सी रंजिश पे ना छोड़ना दामन वफ़ा का कभी,
उम्रें बीत जाती हैं, दिल का रिश्ता बनाने में||
वक्त के पन्ने पलटकर
फ़िर वो हसीं लम्हे जीने को दिल चाहता है
कभी मुशाकराते थे सभी दोस्त मिलकर
अब उन्हें साथ देखने को दिल तरस जाता है
ज़िन्दगी का हर राज़ तन्हाई में पा लिया,
जिस का भी गम मिला अपना बना लिया|
अपना दर्द सुनने को जब कोई न मिला,
तो रखा आइना और खुद को ही सुना लिया||
ज़रा नाज़ुक है दिल, अहिस्ता अहिस्ता संभालो|
है मिटटी का खिलौना, यूँ न हो कि तोड़ डालो||
आइने से अहिस्ता से
नज़रों से परछाई से
अपने आप को बहुत बार गुम पाया हैं
आईने में आज खुद को देख ये गुमान होने लगा,
क्या ये मैं ही हूँ या पहचान खोने लगा,
दिल तड़पता था अंदर ही अंदर, अँधेरे में छुपकर रोता था,
तब जाके जाना दिल लगाने का क्या अंजाम होता था...
याद आती नहीं उनको मेरी, कोई गम नहीं,
याद करते है कितना, उनको कोई भरम नहीं,
अब तो हाल-इ-दिल पूछना भी, न-मुनासिब समझते है वो,
लगता है जैसे, उनको अपना कोई गम नहीं...
मुझको तन्हाई में भी, लोगो की आवाज़ सुनाई देती है,
मुझको अंधेरों में भी, खुद की परछाई दिखाई देती है,
बदल रहा हूँ मैं शायद, यह एहसास होने लगा है,
मुझको मेरी राहों में, तन्हाई दिखाई देती है...
आपका खुश रहना ही आपके
दुश्मनो के लिय
सबसे बडी सजा है
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