Sunday, 11 August 2013

तड़पना

दिल के सागर मे लहरे उठाया ना करो,
ख्वाब बनकर नींद चुराया ना करो,
बहुत चोट लगती है मेरे दिल को,
तुम ख्वाबो में आ कर यू तडपाया ना करो….

 निकलते है तेरे आशिया के आगे से,सोचते है की तेरा दीदार हो जायेगा,
खिड़की से तेरी सूरत न सही तेरा साया तो नजर आएगा

 जिसमे याद ना आए वो तन्हाई किस काम की
बिगड़े रिश्ते ना बने तो खुदाई किस काम की.
बेशक इंसान को ऊंचाई तक जाना है….
पर जहा से अपने ना दिखे वो उँचाई किस काम की….

 पत्थर की दुनिया जज़्बात नही समझती,
दिल में क्या है वो बात नही समझती,
तन्हा तो चाँद भी सितारों के बीच में है,
पर चाँद का दर्द वो रात नही समझती…

 तुम करोगे याद एक दिन इस प्यार के ज़माने को,
चले जाएँगे जब हम कभी ना वापस आने को.
करेगा महफ़िल मे जब ज़िक्र हमारा कोई,,,,
तो तुम भी तन्हाई ढूंढोगे आँसू बहाने को…

 मुझे जगाना मत कभी,
मुझे सोने की आदत है
मुझे हसना मत कभी,
मुझे रोने की आदत है
ज़िन्दगी भले मुझे कितने भी मौके दे दोस्तों ..
मुझे बताना मत कभी , मुझे खोने की आदत है…

 अपनी सांसों में महकता पाया है तुझे,
हर ख्वाब मे बुलाया है तुझे,
क्यू न करे याद तुझ को
जब खुदा ने हमारे लिए बनाया है तुझे.

 एक दिन इस दुनियाँ से हम चले जायेंगे !
हजारों तारों में हम आपको नज़र आयेंगे !!
आप कोई ख्वाइश खुदा से माँगना....!!
हम उसे पूरा करने के लिए उसी वक्त टूट जायेंगे !!

 मेरे आगोश में मरने की दुवा करती थी !
वो मुझे अपनी जिंदगी कहा करती थी !!
बात किस्मत की हैं जो जुदा हो गए हम !
वर्ना वो मुझे अपनी तक़दीर कहा करती थी !!

 आज हर - एक पल खुबसूरत हैं !
दिल में सिर्फ दोस्ती की सूरत हैं !!
कुछ भी कहे ये दुनियाँ हमको...!
हमें दुनियाँ से ज्यादा दोस्तों की जरुरत हैं !!

  फूलों को खिलना सिखाया नहीं जाता !
काँटों को चुभना बताया नहीं जाता...!!
कोई बन जाता हैं खुद से अपना !
वर्ना हर किसी को अपना बनाया नहीं जाता !!


                     तेरे होने पर खुद को तनहा समझू !
मैं बेवफा हूँ या तुझको बेवफा समझू !!
ज़ख्म भी देते हो मलहम भी लगाते हो !
ये तेरी आदत हैं या इसे तेरी अदा समझू !!

                     वफ़ा करते रहे हम इबादत की तरह !
फिर इबादत खुद एक गुनाह हो गई !!
कितना सुहाना था सफर जब साथ थी तुम !
फिर क्या हुवा की मंजिल जुदा हो गई !!

                     बस कर उजरेंगे कभी सोचा था !
ऐसी दुवा से गुजरेंगे कभी सोचा था !!
कितना विश्वास था उसके प्यार पे....!
इस तरह धोखा देगी कभी सोचा था !!

                     मेरी चाहत ने उसे ख़ुशी दे दी !
बदले में उसने मुझे सिर्फ खामौशी दे दी !!
रब से दुवा मांगी मैंने मरने की.....!
उसने भी तड़पने के लिए जिंदगी दे दी !!

                     दुनियाँ में कौन हैं हम बेगानों का !
जो थी वो कर गई खून अरमानो का !!
खुशियाँ क्या हैं ये हमें मालुम नहीं !
गमो से भी गहरा नाता हैं हम दीवानों का !!

                     बेवफा हैं दुनियाँ किसी का एतबार करो !
हर पल देते हैं धोखा किसी से प्यार करो !!
मीट जाओ उम्र भर तनहा जी कर....!
पर किसी के साथ आँखे चार करो !!

                   वो बेवफा निकली तो क्या हुवा !
कुछ दिन का तो साथ निभाया था !!
तड़पता हुवा छोर गया तो क्या गिला !
तड़पना भी तो उसी ने सिखाया था !!


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