पहली मोहब्बत में खता कर रहा हूँ !
किसी बेवफा से वफा कर रहा हूँ.....!!
वो ठुकराए तो क्या हुवा मेरे खुदा !
तुही मिला दे उनसे ये दुवा कर रहा हूँ !!
वो हमारे कब थे जो बेगाने हो गए !
ज़रा सी बात थी क्या फ़साने हो गए !!
क्या उसे इलज़ाम दे क्या सुनाये हालेदिल !
अब कोई होगा नया हम पुराने हो गए !!
कोई मिला ही नहीं जिसको वफ़ा देता !
हर एक ने धोखा दिया किस - किस को सजा देता !!
ये तो हम थे की चुप रह गए वर्ना......!
दास्तान सुनाते तो महफिल को रुला देता !!
दर्द की बाज़ार खुली परी हैं !
वो चीज न लो जो अंदर से जली परी हैं !!
वफ़ा का तलाश छोर दो एय दोस्तों....!
ये दुनियाँ बेवफाओ से भरी परी हैं !!
उनकी चाहत में दिल मजबूर हो गया !
बेवफाई करना उनका दस्तूर हो गया !!
कसूर उनका नहीं मेरा था....!
हमने चाहा ही इतना की उनको गुरुर हो गया !!
अगर जानते राह-ए-वफा पे साथ न दोगे !
तो हम तेरे वादों पे ऐतबार न करते...!!
अगर वाकिफ होते तेरी बेवफाई से तो !
भूल से भी तुम से प्यार नहीं करते...!!
वो गई जो हाथ छोर कर !
अब तनहा चलना सिख रहे हैं !!
हर बार मनाया उसको हमने !
अब खुद को मनाना सिख रहे हैं !!
प्यास ऐसी की पी जाऊ आँखे तेरी !
नसीब ऐसा की हासिल जहर भी नहीं !!
बे ग़र्ज वफाए कोई हमसे पूछे...!
जिसे टूट के चाहा उसे खबर भी नहीं !!
किसी बेवफा से वफा कर रहा हूँ.....!!
वो ठुकराए तो क्या हुवा मेरे खुदा !
तुही मिला दे उनसे ये दुवा कर रहा हूँ !!
वो हमारे कब थे जो बेगाने हो गए !
ज़रा सी बात थी क्या फ़साने हो गए !!
क्या उसे इलज़ाम दे क्या सुनाये हालेदिल !
अब कोई होगा नया हम पुराने हो गए !!
कोई मिला ही नहीं जिसको वफ़ा देता !
हर एक ने धोखा दिया किस - किस को सजा देता !!
ये तो हम थे की चुप रह गए वर्ना......!
दास्तान सुनाते तो महफिल को रुला देता !!
दर्द की बाज़ार खुली परी हैं !
वो चीज न लो जो अंदर से जली परी हैं !!
वफ़ा का तलाश छोर दो एय दोस्तों....!
ये दुनियाँ बेवफाओ से भरी परी हैं !!
उनकी चाहत में दिल मजबूर हो गया !
बेवफाई करना उनका दस्तूर हो गया !!
कसूर उनका नहीं मेरा था....!
हमने चाहा ही इतना की उनको गुरुर हो गया !!
अगर जानते राह-ए-वफा पे साथ न दोगे !
तो हम तेरे वादों पे ऐतबार न करते...!!
अगर वाकिफ होते तेरी बेवफाई से तो !
भूल से भी तुम से प्यार नहीं करते...!!
वो गई जो हाथ छोर कर !
अब तनहा चलना सिख रहे हैं !!
हर बार मनाया उसको हमने !
अब खुद को मनाना सिख रहे हैं !!
प्यास ऐसी की पी जाऊ आँखे तेरी !
नसीब ऐसा की हासिल जहर भी नहीं !!
बे ग़र्ज वफाए कोई हमसे पूछे...!
जिसे टूट के चाहा उसे खबर भी नहीं !!
No comments:
Post a Comment