Wednesday, 28 August 2013

बुलंद

मुझे इतनी फुर्सत कहाँ कि मैं तक़दीर का लिखा देखूं;
बस अपने दोस्तों की मुस्कराहट देख कर समझ जाता हूँ
कि मेरी तक़दीर बुलंद है!♥


 खुदा सें कोई बात अन्जान नही होती.
इन्सान की बंदगी बेईमान नही होती!
कभी तो माँगा होगा हमने एक प्यारा सा रिश्ता.
वर्ना यूँ ही आपसे पहचान नही होती...!


 "दरिया रास्ते निकाल तो लेता है मगर,
कितने गाँव उजड़ जाते है नहीं देखता"....


 रात के टुकड़ों पे पलना छोड़ दे
शमा से कह दों के जलना छोड़ दे
मुश्किलें तो हर सफ़र का हुस्न हैं,
कैसे कोई राह चलना छोड़ दे


 दिल जब टूटता है तो आवाज नहीं आती!
हर किसी को मुहब्बत रास नहीं आती!
ये तो अपने-अपने नसीब की बात है!
कोई भूलता नहीं और किसी को याद भी नहीं आती!


 कौन पूछता है पिंजरे में बंद पंछीयों को..
याद तो उनकी आती है जो उड़ जाया करते है.


 रफ्तार जिन्दगी की कुछ यू बनाये रखियेँ
दुश्मन कोई आगे निकल न पाये और दोस्त कोई पीछे छूट न जाये


 ख़ुशी पाने क चक्कर में गवां दी हर ख़ुशी हमने
हम कैसे लोग हैं जो खुद को समझदार कहते हैं

 किसी का साँस तक लेना भी जिसमे हो जाए दूभर
क्यों चाहने वाले इस चाहत को ही अब प्यार कहते हैं


 दिल की अमीरी बाज़ार में नहीं मिलती !
सच्ची दोस्ती हर डाल पे नहीं खिलती !!
अपनों पे सदा ऐतबार रखो दोस्त...!
क्यों की सच्ची दोस्ती बार - बार नहीं मिलती !!


 एक मुलाकात करो हम से इनायत समझ कर !
देंगे जिंदगी का हिसाब क़यामत समझ कर !!
कभी हमारी दोस्ती पर शक न करना....!





हम दोस्ती भी करते हैं तो इबादत समझ कर !!

 पास बैठकर दिल उदास नहीं होता !
वक़्त गुजरते हैं कैसे ये एहसास नहीं होता !!
बिछर कर भर आती हैं आँखे......!
मगर आंसू पोछने के लिए कोई पास नहीं होता !!


 दिल को खरीदने वाले हजार मिल जायेंगे !
आपको दगा देने वाले हजार मिल जायेंगे !!
मिलेगा न आपको हम जैसा कोई.....!
मिलने को तो दोस्त बेसुमार मिल जायेंगे !!


 न जाने मौत क्यों नहीं आती !
ये साँस बंद क्यों नहीं हो जाती !!
नफरत हैं इस जिंदगी से मुझे !
न जाने फिर भी खुदा को मेरी याद क्यों नहीं आती !!


 हर सपना खुशी का पूरा नहीं होता,
कोई किसी के बिना अधुरा नहीं होता,
जो रोशन करता है सब रातों को,
वो चाँद भी तो हर बार पूरा नहीं होता


 प्यार के उजाले में गम का अंधेरा क्युँ है,
जिसको हम चाहें वही रूलाता क्युँ है,
मेरे रबा अगर वो मेरा नसीब नही तो..
ऐसे लोगों से हमें मिलाता क्युँ है..


 बुलंदियाँ मेरे राहों में होगी
ज़ज़बात इन निगाहों में होगी
गर खुदा का साथ रहे हमेशा
तो मंजिल हमारे इरादों में होगी.

 दिया तो खामोश है मगर दिल तो जलता है
चले आओ जहां तक रोशनी नज़र आये
तेरे हमनाम को जब कोई पुकारे है क्काहीन
जी धड़क जाता है मेरा कि कहीं तू ही ना हो

 दिल से खेलना हमे आता नहीं
इसलिये इश्क की बाजी हम हार गए
शायद मेरी जिन्दगी से बहुत प्यार था उन्हें
इसलिये मुझे जिंदा ही मार गए


 खामोशिया तेरी मुझसे बातें करती है,
मेरी हर आह हर दर्द समझती है,
पता है मजबूर है तू भी और मैं भी ,
फिर भी आँखें तेरे दीदार को तरसती है,

 दोस्ती होती नहीं, भूल जाने के लिए,
बेशक दोस्त मिलते नहीं, बिखर जाने के लिए,
लेकिन दोस्ती करके खुश रहोगे इतना,
की वक़्त ही नहीं मिलेगा, आंसू बहाने के लिए!

 आँखों में ही देखा दिल में उतरकर नहीं देखा ,
कश्ती के मुशाफिर ने समंदर नहीं देखा ,
और पत्थर ही समझते रहे मेरे चाहने वाले ,
मै मोम था उसने कभी छूकर नहीं देखा....

 राह तकते है हम उनके इंतज़ार में!
साँसे भरते हैं उनके एक दीदार में!
रात न कटती है न होता है सवेरा!
जबसे दिल के हर कोने में हुआ है आपका बसेरा!

 चुपके से आकर इस दिल में उतर जाते हो
सांसों में मेरी खुशबु बन के बिखर जाते हो
कुछ यूँ चला है तेरे 'इश्क' का जादू
सोते जागते तुम ही तुम नज़र आते हो .







श्री कृष्णा जन्मास्टमी

कृषण की महिमा, कृषण का प्यार;
कृषण में श्रधा, कृषण से ही संसार;
मुबारक हो आप सबको जन्मआष्ट्मी का त्योहार!




 हरे कृष्णा हरे कृष्णा
कृष्णा कृष्णा हरे हरे
हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे


 ईश्वर सत्य है॥ सत्य ही शिव है॥
शिव ही सुन्दर है॥ सत्यम शिवम सुंदरम॥
“ ऊँ नम: शिवाय ” “ ऊँ नम: शिवाय ” “ ऊँ नम: शिवाय ”



कण-कण में बसे मेरे श्याम ,
मुझ डर काहे का..?? बोलो श्री कृष्ण कन्हैया लाल की जय....!!

नंद के घर आनंद ही आनंद भायो,
जो नंद के घर गोपाल आयो,
जय हो मुरलीधर गोपाल की,
जय हो नंदलाल की !!

आप सभी को कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ !!

Saturday, 17 August 2013

एक अजीब-सा मंज़र नज़र आता है
हर एक कतरा समंदर नज़र आता है
कहाँ जाकर बनाऊं मैं घर शीशे का
हर एक हाथ में पत्थर नज़र आता है.


 खामोशियां तेरी मुझसे बात करती हैं,
मेरी हर आह हर दर्द समझती हैं,
पता है मजबूर है तू भी और मैं भी,
फिर भी आंखें तेरे दीदार को तरसती हैं।


बड़े अजीब हैं ये जिन्दगी के रास्ते,
अनजान मोड़ पर कुछ लोग दोस्त बन जाते हैं,
मिलने की खुशी दे या न दे,
बिछड़ने का गम जरूर दे जाते हैं


मत करो कोई वायदा जिसे तुम निभा न सको,
मत चाहो उसे जिसे तुम पा न सको,
प्यार कहां किसी का पूरा होता है,
इसका तो पहला शब्द की अधूरा होता है।

मेरी हर खता पर नाराज न होना,
अपनी प्यारी सी मुस्कान कभी न खोना,
सुकून है देख कर आपकी मुस्कुराहट को,
मुझे मौत भी आए तो भी मत रोना।

भूलना तुम्हें न आसान होगा,
जो भूले तुम्हें वो नादान होगा,
आप तो बसते हो रूह में हमारी,
आप हमें न भुलाएं ये आपको अहसान होगा।
 


कभी किसी से जिक्र-ए-जुदाई मत करना,
इस दिल से कभी रुसवाई मत करना,
जब दिल उठ जाए हमसे तो बता देना,
ना बता कर बेवफाई मत करना।

 ज़िन्दगी में हमेशा नये लोग मिलेंगे
कहीं ज़्यादा तो कहीं कम मिलेंगे
ऐतबार ज़रा सोचकर करना
मुमकिन नहीं, हर जगह तुम्हें हम मिलेंगे

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लोग अपना बना के छोड़ देते हैं
रिश्ता गैरों से जोड़ लेते हैं
हम तो एक फूल भी न तोड़ सके
लोग तो दिल भी तोड़ देते हैं

 साथ तो मांगने से मिल सकता है
लेकीन प्यार मांगने से नही मिलता
क्योंकि प्यार किया नहीं जाता प्यार तो हो जाता है
दिल से दिल को जब कोई प्यारा लगता है।

 तनहाइयों में ही इश्क है,
एक बात को सबसे छुपाना इश्क है,
यूं तो नींद नहीं आती हमें रातभर,
मगर सोते-सोते जगना इश्क है।

 तनहाइयों में ही इश्क है,
एक बात को सबसे छुपाना इश्क है,
यूं तो नींद नहीं आती हमें रातभर,
मगर सोते-सोते जगना इश्क है।

यादों की धुंध में आपकी परछाईं सी लगती है,
कानों में गूंजती शहनाई सी लगती है,
आप करीब हैं तो अपनापन है,
वरना सीने में सांसें भी पराई सी लगती हैं।

जब-जब घिरे बादल तेरी याद आई,
जब झूम के बरसा सावन तेरी याद आई,
जब-जब मैं भीगा तेरी याद आई,
अब रहा नहीं जाता जान लौट के आ जा।

दिल अभी उदास है,
और वक्त बीता नहीं।
नसीब की किताब से,
हिसाब जीता नहीं।


टूटा है जब भ्रम,
आंखे होती हैं क्यूं नम।
क्यूं मंजिल करीब हो,
तो हार जाते हैं कदम।

ये कौन से सवाल हैं,
जवाब सूझता नहीं।
जहां भर की बात की,
जो बात थी नहीं कही।

वो कौन सी है बेबसी,
वो कौन सा अजब है।
की जिसके रू से आज,
मेरा नाम भी खराब है।



बहुत दूर मगर बहुत पास रहते हो,
आंखों से दूर मगर दिल के पास रहते हो,
मुझे बस इतना बता दो क्या,
तुम भी मेरे बिना उदास रहते हो।
 
 
हर खामोशी में एक बात होती है,
हर दिल में एक याद होती है,
आपको पता हो या न हो,
आपकी खुशी के लिए रोज फरियाद होती है।
 काश ये जिंदगी हंसीन होती,
खुद के चाहने से हर दुआ कुबूल होती है,
कहने को तो सब अपने हैं पर,
काश कोई ऐसा होता जिसे मेरे दर्द से तकलीफ होती।
 

Friday, 16 August 2013

खामोशियाँ

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कहीं ज़मीन तो कहीं आसमान नहीं मिलता
जिसे भी देखिये वो अपने आप में गुम हैं
ज़ुबाँ मिली हैं मगर हमज़ुबाँ नहीं मिलता

Sunday, 11 August 2013

प्यास ऐसी

पहली मोहब्बत में खता कर रहा हूँ !
किसी बेवफा से वफा कर रहा हूँ.....!!
वो ठुकराए तो क्या हुवा मेरे खुदा !
तुही मिला दे उनसे ये दुवा कर रहा हूँ !!

     वो हमारे कब थे जो बेगाने हो गए !
ज़रा सी बात थी क्या फ़साने हो गए !!
क्या उसे इलज़ाम दे क्या सुनाये हालेदिल !
अब कोई होगा नया हम पुराने हो गए !!


       कोई मिला ही नहीं जिसको वफ़ा देता !
हर एक ने धोखा दिया किस - किस को सजा देता !!
ये तो हम थे की चुप रह गए वर्ना......!
दास्तान सुनाते तो महफिल को रुला देता !!


      दर्द की बाज़ार खुली परी हैं !
वो चीज लो जो अंदर से जली परी हैं !!
वफ़ा का तलाश छोर दो एय दोस्तों....!
ये दुनियाँ बेवफाओ से भरी परी हैं !!

 उनकी चाहत में दिल मजबूर हो गया !
बेवफाई करना उनका दस्तूर हो गया !!
कसूर उनका नहीं मेरा था....!
हमने चाहा ही इतना की उनको गुरुर हो गया !!

  अगर जानते राह--वफा पे साथ दोगे !
तो हम तेरे वादों पे ऐतबार करते...!!
अगर वाकिफ होते तेरी बेवफाई से तो !
भूल से भी तुम से प्यार नहीं करते...!!

  वो गई जो हाथ छोर कर !
अब तनहा चलना सिख रहे हैं !!
हर बार मनाया उसको हमने !
अब खुद को मनाना सिख रहे हैं !!

  प्यास ऐसी की पी जाऊ आँखे तेरी !
नसीब ऐसा की हासिल जहर भी नहीं !!
बे ग़र्ज वफाए कोई हमसे पूछे...!
जिसे टूट के चाहा उसे खबर भी नहीं !!

तड़पना

दिल के सागर मे लहरे उठाया ना करो,
ख्वाब बनकर नींद चुराया ना करो,
बहुत चोट लगती है मेरे दिल को,
तुम ख्वाबो में आ कर यू तडपाया ना करो….

 निकलते है तेरे आशिया के आगे से,सोचते है की तेरा दीदार हो जायेगा,
खिड़की से तेरी सूरत न सही तेरा साया तो नजर आएगा

 जिसमे याद ना आए वो तन्हाई किस काम की
बिगड़े रिश्ते ना बने तो खुदाई किस काम की.
बेशक इंसान को ऊंचाई तक जाना है….
पर जहा से अपने ना दिखे वो उँचाई किस काम की….

 पत्थर की दुनिया जज़्बात नही समझती,
दिल में क्या है वो बात नही समझती,
तन्हा तो चाँद भी सितारों के बीच में है,
पर चाँद का दर्द वो रात नही समझती…

 तुम करोगे याद एक दिन इस प्यार के ज़माने को,
चले जाएँगे जब हम कभी ना वापस आने को.
करेगा महफ़िल मे जब ज़िक्र हमारा कोई,,,,
तो तुम भी तन्हाई ढूंढोगे आँसू बहाने को…

 मुझे जगाना मत कभी,
मुझे सोने की आदत है
मुझे हसना मत कभी,
मुझे रोने की आदत है
ज़िन्दगी भले मुझे कितने भी मौके दे दोस्तों ..
मुझे बताना मत कभी , मुझे खोने की आदत है…

 अपनी सांसों में महकता पाया है तुझे,
हर ख्वाब मे बुलाया है तुझे,
क्यू न करे याद तुझ को
जब खुदा ने हमारे लिए बनाया है तुझे.

 एक दिन इस दुनियाँ से हम चले जायेंगे !
हजारों तारों में हम आपको नज़र आयेंगे !!
आप कोई ख्वाइश खुदा से माँगना....!!
हम उसे पूरा करने के लिए उसी वक्त टूट जायेंगे !!

 मेरे आगोश में मरने की दुवा करती थी !
वो मुझे अपनी जिंदगी कहा करती थी !!
बात किस्मत की हैं जो जुदा हो गए हम !
वर्ना वो मुझे अपनी तक़दीर कहा करती थी !!

 आज हर - एक पल खुबसूरत हैं !
दिल में सिर्फ दोस्ती की सूरत हैं !!
कुछ भी कहे ये दुनियाँ हमको...!
हमें दुनियाँ से ज्यादा दोस्तों की जरुरत हैं !!

  फूलों को खिलना सिखाया नहीं जाता !
काँटों को चुभना बताया नहीं जाता...!!
कोई बन जाता हैं खुद से अपना !
वर्ना हर किसी को अपना बनाया नहीं जाता !!


                     तेरे होने पर खुद को तनहा समझू !
मैं बेवफा हूँ या तुझको बेवफा समझू !!
ज़ख्म भी देते हो मलहम भी लगाते हो !
ये तेरी आदत हैं या इसे तेरी अदा समझू !!

                     वफ़ा करते रहे हम इबादत की तरह !
फिर इबादत खुद एक गुनाह हो गई !!
कितना सुहाना था सफर जब साथ थी तुम !
फिर क्या हुवा की मंजिल जुदा हो गई !!

                     बस कर उजरेंगे कभी सोचा था !
ऐसी दुवा से गुजरेंगे कभी सोचा था !!
कितना विश्वास था उसके प्यार पे....!
इस तरह धोखा देगी कभी सोचा था !!

                     मेरी चाहत ने उसे ख़ुशी दे दी !
बदले में उसने मुझे सिर्फ खामौशी दे दी !!
रब से दुवा मांगी मैंने मरने की.....!
उसने भी तड़पने के लिए जिंदगी दे दी !!

                     दुनियाँ में कौन हैं हम बेगानों का !
जो थी वो कर गई खून अरमानो का !!
खुशियाँ क्या हैं ये हमें मालुम नहीं !
गमो से भी गहरा नाता हैं हम दीवानों का !!

                     बेवफा हैं दुनियाँ किसी का एतबार करो !
हर पल देते हैं धोखा किसी से प्यार करो !!
मीट जाओ उम्र भर तनहा जी कर....!
पर किसी के साथ आँखे चार करो !!

                   वो बेवफा निकली तो क्या हुवा !
कुछ दिन का तो साथ निभाया था !!
तड़पता हुवा छोर गया तो क्या गिला !
तड़पना भी तो उसी ने सिखाया था !!