Sunday, 8 September 2013

राज़

हर  तरफ  गैहराही है ,किनारा  नज़र  नहीं  आता
वादा  तोह  कर  लेते  है
बहोत  मोहब्बत  कर  लेने  के  बाद ,पर  जब  मुसीबत  पड़े
तोह  कोई  साथ  निभाने  नहीं  आता


यादों को अपने दिल से मिटा क्यूं नही देते..
जो जा चुका है उसको भुला क्यूं नही देते..
मुजरिम हूं मैं तेरा मुझे इतना तो बता..
खामोश खडे हो क्यूं.. मुझे सजा क्यूं नहीं देते..


मेरी  ज़िन्दगी  के राज़  मे एक  राज़  तुम  भी   हो
मेरी  बंदगी  की  प्यास  मे  एक  प्यास  तुम  भी  हो
तुम  क्या  हो , कुछ  तो  हो ! या  नहीं  हो
मगर  मेरी  ज़िन्दगी  के  काश   में  एक काश  तुम  भी  हो 


टूट गया दिल पर अरमां वही है;
दूर रहते हैं फिर भी प्यार वही है;
जानते हैं कि मिल नहीं पायेंगे;
फिर भी इन आँखों में इंतज़ार वही है।


वो आपका पलके झुका के मुस्कुराना;
वो आपका नजरें झुका के शर्मना;
वैसे आपको पता है या नहीं हमें पता नहीं;
पर इस दिल को मिल गया है उसका नज़राना।


हमारें आंसू पोछकर वो मुस्कुराते हैं;
इसी अदा से तो वो दिल को चुराते हैं;
हाथ उनका छू जाए हमारे चेहरे को;
इसी उम्मीद में तो हम खुद को रुलाते हैं!


यादों की किम्मत वो क्या जाने;
जो ख़ुद यादों को मिटा दिए करते हैं,
यादों का मतलब तो उनसे पूछो जो,
यादों के सहारे जिया करते हैं!


होंठ कह नही सकते जो फ़साना दिल का;
शायद नजरों से वो बात हो जाए;
इसी उम्मीद में इंतजार करते हैं रात का;
कि शायद सपनों मे ही मुलाकात हो जाए!


दो दिलों की धड़कनों में एक साज़ होता है;
सबको अपनी-अपनी मोहब्बत पर नाज़ होता है;
उसमें से हर एक बेवफा नहीं होता;
उसकी बेवफ़ाई के पीछे भी कोई राज होता है!


इतनी मुश्किल भी ना थी राह मेरी मोहब्बत की;
कुछ ज़माना खिलाफ हुआ, कुछ वो बेवफा हो गए!


मौसम की तरह बदल देते हैं लोग हमनफस अपना;
हमसे तो अपना सितमगर भी बदला नहीं जाता!


हर धड़कन में एक राज़ होता है;
बात को बताने का एक अंदाज़ होता है;
जब तक ठोकर न लगे बेवाफ़ाई की;
हर किसी को अपने प्यार पर नाज़ होता है।


 

लेहरों से डरकर नौका पार नहीं होती..

लेहरों से डरकर नौका पार नहीं होती..
हिम्मत करने वालों की कभी हार नही होती..
नन्ही चींटीं जब दाना लेकर चढती है..
चढती दीवारों पर सो बार फ़िसलती है..
मनका विश्वास रगॊं मे साहस भरता है..
चढकर गिरना, गिरकर चढना ना अखरता है..
मेहनत उसकी बेकार हर बार नहीं होती..
हिम्मत करने वालों की कभी हार नही होती..
डुबकियां सिंधुमें गोताखोर लगाता है..
जा जा कर खाली हांथ लौटकर आता है..
मिलते ना सहज ही मोती गेहरे पानी में..
बढता दूना विश्वास इसी हैरानी में..
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती..
हिम्मत करने वालों की कभी हार नही होती..
असफ़लता एक चुनौती है.. स्वीकार करो..
क्या कमी रेह गयी देखो और सुधार करो..
जब तक ना सफ़ल हो नींद-चैन को त्यागो तुम..
संघर्षोंका मैदान छोड मत भागो तुम..
कुछ किये बिना ही जयजयकार नहीं होती..
हिम्मत करने वालों की कभी हार नही होती..
——————————————कवी श्रीयुत हरिवंश राय बच्चन..

तन्हाई

तन्हाई  किसी  का  इंतज़ार  नहीं  करती 
किस्मत  कभी  बेवफाई  नहीं  करती
उनसे  दूर  होने  का  असर  है  वरना
परछाई कभी  जिस्म  पर  वार  नहीं  करती .


मेरे बाद किधर जायेगी तन्हाई..
मैं जो मरा तो मर जायेगी तन्हाई..
मै जब रो-रो के दरिया बन जाउंगा..
उस दिन पार उतर जायेगी तन्हाई..

ये जिंदगी तन्हाई को साथ लाती है,
   हमें कुछ करने के काबिल बनाती  है.
सच है मिलना जुलना बहुत ज़रूरी है,
     पर ये तन्हाई ही हमें जीना  सिखाती है.

किसी दिन तेरे दिलमें उतर जाऊंगा..
मैं तो लम्हा हूं, तुझे छूके गुज़र जाऊंगा..
तेरी ज़िन्दगी मे कोई रंग भर जाऊंगा..
चल पडा हूं जो, तुझसे मिलकर ही जऊंगा..

 कुछ  ना  किसी  से  बोलेंगे बस
तन्हाई  में  चुप  -चाप  रो  लेंगे अब
नींद  तो  आँखों  में  आती  नहीं
चलो  जब  मौत  आएगी  तब  जी  भर  के  सो  लेंगे .

ता उम्र घर भरते रहे हैं जिस हुनर से लोग,
अब भी लगे हैं बेचने अपने हुनर को लोग|
पीछे खड़ी है फौज बेरोज़गारों की-
उनको भी कुछ दिखाने दें अपने हुनर ये लोग |

गम  की  परछाईयाँ
यार  की  रुसवाईयाँ
वाह रे  मुहोब्बत ! तेरे  ही  दर्द
और  तेरी  ही  दवाईयां 


ये मौसम ए बरसात हमें रास न आया
जो ज़ख़्म हरे होते वही सूखे पड़े हैं
बहने दो मेरे अश्क, कि यादों का है मौसम
सावन मे तो उतरे हुए दरिया भी चढ़े हैं

अपनों  को  जब  अपने  खो  देते  है 
तन्हाइयो   मे  वो  रो  देते  है
क्यों  इन  पलकों  पर  बिठाते  है  लोग  उनको 
जो  इन  पलकों  को  अक्सर  आंसुओ  से  भेगो  देते  है  


यही  सच्चाई  है   हकीकत  है 
यही  दस्तूर -ए-ज़िन्दगी  है
कुछ  देर  मिलते  हैं  हम  राही
फिर  हर  कोई  तन्हा  हो  जाता  है .

Saturday, 7 September 2013

सुप्रभात

जगाओ मन में आज,एक और नयी आशा
चूनलो अपने लिए,एक और नयी दिशा
कल की निशा के साथ,बीती बात गयी
उड़ जा रे पंछी , एक नयी भोर भई.
नव भोर, सुप्रभात, 


नई सी सुबह नया सा सवेरा,
सूरज की किरण मे हवाओ का बसेरा,
खुले आसमान मे सूरज का चेहरा,
मुबारक हो आपको ये हसीन सवेरा.


Sunday, 1 September 2013

निगाहों

बुरा वक़्त आया है कैसा लबों पर,
निगाहों से उनको छुआ जा रहा है।
मुझे खुदक़ुशी की ज़रूरत ही क्या है,
मेरा यार मेरी दवा ला रहा है।


 ना जाने क्यों वो हमसे मुस्कुरा के मिलते हैं,
  अन्दर के सारे गम छुपा के मिलते हैं,
जानते हैं आँखे सच बोल जाती हैं,
  शायद इसी लिए वो नज़र झुका के मिलतें हैं


 कुछ यादें दिल को लुभाती हैं,
  कुछ बातें दिल को जगाती हैं,
आपकी यादों की क्या तारीफ करें,
  ये तो आने में पल और....
...... जाने में बहुत वक्त लगाती हैं.


कमाल का होसला दिया रब नेइंसानों को..
वाकिफ हम अगले पल से नहीं और वादे जन्मो के कर लेते है..


यहाँ हर किसी को दरारों में झाँकने की आदत है,
दरवाजे खोल दो, कोई पूछने भी नहीं आएगा।


वक्त बदलता है जिन्दगी के साथ, जिन्दगी बदलती है वक्त के साथ |
वक्त नहीं बदलता अपनों के साथ, बस अपने बदलते हैं वक्त के साथ||



 
कभी खामोशी भी बहुत कुछ कह जाती है,
तड़पने क लिए सिर्फ़ यादे रह जाती है..
क्या फ़र्क पड़ता है ,दिल हो या काग़ज़,
जलने क बाद सिर्फ़ राख रह जाता है…
 
 
इस दुनियाँ में सब कुछ बिकता है,
फिर जुदाई ही रिश्वत क्युँ नही लेती?
मरता नहीं है कोई किसी से जुदा होकर,
बस यादें ही हैं जो जीने नहीं देती.. …
 








Wednesday, 28 August 2013

बुलंद

मुझे इतनी फुर्सत कहाँ कि मैं तक़दीर का लिखा देखूं;
बस अपने दोस्तों की मुस्कराहट देख कर समझ जाता हूँ
कि मेरी तक़दीर बुलंद है!♥


 खुदा सें कोई बात अन्जान नही होती.
इन्सान की बंदगी बेईमान नही होती!
कभी तो माँगा होगा हमने एक प्यारा सा रिश्ता.
वर्ना यूँ ही आपसे पहचान नही होती...!


 "दरिया रास्ते निकाल तो लेता है मगर,
कितने गाँव उजड़ जाते है नहीं देखता"....


 रात के टुकड़ों पे पलना छोड़ दे
शमा से कह दों के जलना छोड़ दे
मुश्किलें तो हर सफ़र का हुस्न हैं,
कैसे कोई राह चलना छोड़ दे


 दिल जब टूटता है तो आवाज नहीं आती!
हर किसी को मुहब्बत रास नहीं आती!
ये तो अपने-अपने नसीब की बात है!
कोई भूलता नहीं और किसी को याद भी नहीं आती!


 कौन पूछता है पिंजरे में बंद पंछीयों को..
याद तो उनकी आती है जो उड़ जाया करते है.


 रफ्तार जिन्दगी की कुछ यू बनाये रखियेँ
दुश्मन कोई आगे निकल न पाये और दोस्त कोई पीछे छूट न जाये


 ख़ुशी पाने क चक्कर में गवां दी हर ख़ुशी हमने
हम कैसे लोग हैं जो खुद को समझदार कहते हैं

 किसी का साँस तक लेना भी जिसमे हो जाए दूभर
क्यों चाहने वाले इस चाहत को ही अब प्यार कहते हैं


 दिल की अमीरी बाज़ार में नहीं मिलती !
सच्ची दोस्ती हर डाल पे नहीं खिलती !!
अपनों पे सदा ऐतबार रखो दोस्त...!
क्यों की सच्ची दोस्ती बार - बार नहीं मिलती !!


 एक मुलाकात करो हम से इनायत समझ कर !
देंगे जिंदगी का हिसाब क़यामत समझ कर !!
कभी हमारी दोस्ती पर शक न करना....!





हम दोस्ती भी करते हैं तो इबादत समझ कर !!

 पास बैठकर दिल उदास नहीं होता !
वक़्त गुजरते हैं कैसे ये एहसास नहीं होता !!
बिछर कर भर आती हैं आँखे......!
मगर आंसू पोछने के लिए कोई पास नहीं होता !!


 दिल को खरीदने वाले हजार मिल जायेंगे !
आपको दगा देने वाले हजार मिल जायेंगे !!
मिलेगा न आपको हम जैसा कोई.....!
मिलने को तो दोस्त बेसुमार मिल जायेंगे !!


 न जाने मौत क्यों नहीं आती !
ये साँस बंद क्यों नहीं हो जाती !!
नफरत हैं इस जिंदगी से मुझे !
न जाने फिर भी खुदा को मेरी याद क्यों नहीं आती !!


 हर सपना खुशी का पूरा नहीं होता,
कोई किसी के बिना अधुरा नहीं होता,
जो रोशन करता है सब रातों को,
वो चाँद भी तो हर बार पूरा नहीं होता


 प्यार के उजाले में गम का अंधेरा क्युँ है,
जिसको हम चाहें वही रूलाता क्युँ है,
मेरे रबा अगर वो मेरा नसीब नही तो..
ऐसे लोगों से हमें मिलाता क्युँ है..


 बुलंदियाँ मेरे राहों में होगी
ज़ज़बात इन निगाहों में होगी
गर खुदा का साथ रहे हमेशा
तो मंजिल हमारे इरादों में होगी.

 दिया तो खामोश है मगर दिल तो जलता है
चले आओ जहां तक रोशनी नज़र आये
तेरे हमनाम को जब कोई पुकारे है क्काहीन
जी धड़क जाता है मेरा कि कहीं तू ही ना हो

 दिल से खेलना हमे आता नहीं
इसलिये इश्क की बाजी हम हार गए
शायद मेरी जिन्दगी से बहुत प्यार था उन्हें
इसलिये मुझे जिंदा ही मार गए


 खामोशिया तेरी मुझसे बातें करती है,
मेरी हर आह हर दर्द समझती है,
पता है मजबूर है तू भी और मैं भी ,
फिर भी आँखें तेरे दीदार को तरसती है,

 दोस्ती होती नहीं, भूल जाने के लिए,
बेशक दोस्त मिलते नहीं, बिखर जाने के लिए,
लेकिन दोस्ती करके खुश रहोगे इतना,
की वक़्त ही नहीं मिलेगा, आंसू बहाने के लिए!

 आँखों में ही देखा दिल में उतरकर नहीं देखा ,
कश्ती के मुशाफिर ने समंदर नहीं देखा ,
और पत्थर ही समझते रहे मेरे चाहने वाले ,
मै मोम था उसने कभी छूकर नहीं देखा....

 राह तकते है हम उनके इंतज़ार में!
साँसे भरते हैं उनके एक दीदार में!
रात न कटती है न होता है सवेरा!
जबसे दिल के हर कोने में हुआ है आपका बसेरा!

 चुपके से आकर इस दिल में उतर जाते हो
सांसों में मेरी खुशबु बन के बिखर जाते हो
कुछ यूँ चला है तेरे 'इश्क' का जादू
सोते जागते तुम ही तुम नज़र आते हो .







श्री कृष्णा जन्मास्टमी

कृषण की महिमा, कृषण का प्यार;
कृषण में श्रधा, कृषण से ही संसार;
मुबारक हो आप सबको जन्मआष्ट्मी का त्योहार!




 हरे कृष्णा हरे कृष्णा
कृष्णा कृष्णा हरे हरे
हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे


 ईश्वर सत्य है॥ सत्य ही शिव है॥
शिव ही सुन्दर है॥ सत्यम शिवम सुंदरम॥
“ ऊँ नम: शिवाय ” “ ऊँ नम: शिवाय ” “ ऊँ नम: शिवाय ”



कण-कण में बसे मेरे श्याम ,
मुझ डर काहे का..?? बोलो श्री कृष्ण कन्हैया लाल की जय....!!

नंद के घर आनंद ही आनंद भायो,
जो नंद के घर गोपाल आयो,
जय हो मुरलीधर गोपाल की,
जय हो नंदलाल की !!

आप सभी को कृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ !!

Saturday, 17 August 2013

एक अजीब-सा मंज़र नज़र आता है
हर एक कतरा समंदर नज़र आता है
कहाँ जाकर बनाऊं मैं घर शीशे का
हर एक हाथ में पत्थर नज़र आता है.


 खामोशियां तेरी मुझसे बात करती हैं,
मेरी हर आह हर दर्द समझती हैं,
पता है मजबूर है तू भी और मैं भी,
फिर भी आंखें तेरे दीदार को तरसती हैं।


बड़े अजीब हैं ये जिन्दगी के रास्ते,
अनजान मोड़ पर कुछ लोग दोस्त बन जाते हैं,
मिलने की खुशी दे या न दे,
बिछड़ने का गम जरूर दे जाते हैं


मत करो कोई वायदा जिसे तुम निभा न सको,
मत चाहो उसे जिसे तुम पा न सको,
प्यार कहां किसी का पूरा होता है,
इसका तो पहला शब्द की अधूरा होता है।

मेरी हर खता पर नाराज न होना,
अपनी प्यारी सी मुस्कान कभी न खोना,
सुकून है देख कर आपकी मुस्कुराहट को,
मुझे मौत भी आए तो भी मत रोना।

भूलना तुम्हें न आसान होगा,
जो भूले तुम्हें वो नादान होगा,
आप तो बसते हो रूह में हमारी,
आप हमें न भुलाएं ये आपको अहसान होगा।
 


कभी किसी से जिक्र-ए-जुदाई मत करना,
इस दिल से कभी रुसवाई मत करना,
जब दिल उठ जाए हमसे तो बता देना,
ना बता कर बेवफाई मत करना।

 ज़िन्दगी में हमेशा नये लोग मिलेंगे
कहीं ज़्यादा तो कहीं कम मिलेंगे
ऐतबार ज़रा सोचकर करना
मुमकिन नहीं, हर जगह तुम्हें हम मिलेंगे

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लोग अपना बना के छोड़ देते हैं
रिश्ता गैरों से जोड़ लेते हैं
हम तो एक फूल भी न तोड़ सके
लोग तो दिल भी तोड़ देते हैं

 साथ तो मांगने से मिल सकता है
लेकीन प्यार मांगने से नही मिलता
क्योंकि प्यार किया नहीं जाता प्यार तो हो जाता है
दिल से दिल को जब कोई प्यारा लगता है।

 तनहाइयों में ही इश्क है,
एक बात को सबसे छुपाना इश्क है,
यूं तो नींद नहीं आती हमें रातभर,
मगर सोते-सोते जगना इश्क है।

 तनहाइयों में ही इश्क है,
एक बात को सबसे छुपाना इश्क है,
यूं तो नींद नहीं आती हमें रातभर,
मगर सोते-सोते जगना इश्क है।

यादों की धुंध में आपकी परछाईं सी लगती है,
कानों में गूंजती शहनाई सी लगती है,
आप करीब हैं तो अपनापन है,
वरना सीने में सांसें भी पराई सी लगती हैं।

जब-जब घिरे बादल तेरी याद आई,
जब झूम के बरसा सावन तेरी याद आई,
जब-जब मैं भीगा तेरी याद आई,
अब रहा नहीं जाता जान लौट के आ जा।

दिल अभी उदास है,
और वक्त बीता नहीं।
नसीब की किताब से,
हिसाब जीता नहीं।


टूटा है जब भ्रम,
आंखे होती हैं क्यूं नम।
क्यूं मंजिल करीब हो,
तो हार जाते हैं कदम।

ये कौन से सवाल हैं,
जवाब सूझता नहीं।
जहां भर की बात की,
जो बात थी नहीं कही।

वो कौन सी है बेबसी,
वो कौन सा अजब है।
की जिसके रू से आज,
मेरा नाम भी खराब है।



बहुत दूर मगर बहुत पास रहते हो,
आंखों से दूर मगर दिल के पास रहते हो,
मुझे बस इतना बता दो क्या,
तुम भी मेरे बिना उदास रहते हो।
 
 
हर खामोशी में एक बात होती है,
हर दिल में एक याद होती है,
आपको पता हो या न हो,
आपकी खुशी के लिए रोज फरियाद होती है।
 काश ये जिंदगी हंसीन होती,
खुद के चाहने से हर दुआ कुबूल होती है,
कहने को तो सब अपने हैं पर,
काश कोई ऐसा होता जिसे मेरे दर्द से तकलीफ होती।
 

Friday, 16 August 2013

खामोशियाँ

कभी किसी को मुकम्मल जहाँ नहीं मिलता
कहीं ज़मीन तो कहीं आसमान नहीं मिलता
जिसे भी देखिये वो अपने आप में गुम हैं
ज़ुबाँ मिली हैं मगर हमज़ुबाँ नहीं मिलता

Sunday, 11 August 2013

प्यास ऐसी

पहली मोहब्बत में खता कर रहा हूँ !
किसी बेवफा से वफा कर रहा हूँ.....!!
वो ठुकराए तो क्या हुवा मेरे खुदा !
तुही मिला दे उनसे ये दुवा कर रहा हूँ !!

     वो हमारे कब थे जो बेगाने हो गए !
ज़रा सी बात थी क्या फ़साने हो गए !!
क्या उसे इलज़ाम दे क्या सुनाये हालेदिल !
अब कोई होगा नया हम पुराने हो गए !!


       कोई मिला ही नहीं जिसको वफ़ा देता !
हर एक ने धोखा दिया किस - किस को सजा देता !!
ये तो हम थे की चुप रह गए वर्ना......!
दास्तान सुनाते तो महफिल को रुला देता !!


      दर्द की बाज़ार खुली परी हैं !
वो चीज लो जो अंदर से जली परी हैं !!
वफ़ा का तलाश छोर दो एय दोस्तों....!
ये दुनियाँ बेवफाओ से भरी परी हैं !!

 उनकी चाहत में दिल मजबूर हो गया !
बेवफाई करना उनका दस्तूर हो गया !!
कसूर उनका नहीं मेरा था....!
हमने चाहा ही इतना की उनको गुरुर हो गया !!

  अगर जानते राह--वफा पे साथ दोगे !
तो हम तेरे वादों पे ऐतबार करते...!!
अगर वाकिफ होते तेरी बेवफाई से तो !
भूल से भी तुम से प्यार नहीं करते...!!

  वो गई जो हाथ छोर कर !
अब तनहा चलना सिख रहे हैं !!
हर बार मनाया उसको हमने !
अब खुद को मनाना सिख रहे हैं !!

  प्यास ऐसी की पी जाऊ आँखे तेरी !
नसीब ऐसा की हासिल जहर भी नहीं !!
बे ग़र्ज वफाए कोई हमसे पूछे...!
जिसे टूट के चाहा उसे खबर भी नहीं !!