Sunday, 1 September 2013

निगाहों

बुरा वक़्त आया है कैसा लबों पर,
निगाहों से उनको छुआ जा रहा है।
मुझे खुदक़ुशी की ज़रूरत ही क्या है,
मेरा यार मेरी दवा ला रहा है।


 ना जाने क्यों वो हमसे मुस्कुरा के मिलते हैं,
  अन्दर के सारे गम छुपा के मिलते हैं,
जानते हैं आँखे सच बोल जाती हैं,
  शायद इसी लिए वो नज़र झुका के मिलतें हैं


 कुछ यादें दिल को लुभाती हैं,
  कुछ बातें दिल को जगाती हैं,
आपकी यादों की क्या तारीफ करें,
  ये तो आने में पल और....
...... जाने में बहुत वक्त लगाती हैं.


कमाल का होसला दिया रब नेइंसानों को..
वाकिफ हम अगले पल से नहीं और वादे जन्मो के कर लेते है..


यहाँ हर किसी को दरारों में झाँकने की आदत है,
दरवाजे खोल दो, कोई पूछने भी नहीं आएगा।


वक्त बदलता है जिन्दगी के साथ, जिन्दगी बदलती है वक्त के साथ |
वक्त नहीं बदलता अपनों के साथ, बस अपने बदलते हैं वक्त के साथ||



 
कभी खामोशी भी बहुत कुछ कह जाती है,
तड़पने क लिए सिर्फ़ यादे रह जाती है..
क्या फ़र्क पड़ता है ,दिल हो या काग़ज़,
जलने क बाद सिर्फ़ राख रह जाता है…
 
 
इस दुनियाँ में सब कुछ बिकता है,
फिर जुदाई ही रिश्वत क्युँ नही लेती?
मरता नहीं है कोई किसी से जुदा होकर,
बस यादें ही हैं जो जीने नहीं देती.. …
 








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