तेरी ख़ामोशी हमारी कमजोरी हैं,
कह नहीं पाना हमारी मज़बूरी हैं,
क्यों नहीं समझते हमारी खामोशियो को,
खामोशियो को जुबा देना बहुत जरुरी हैं
हम वो नहीं जो दिल तोड़ देंगे,
थाम कर हाथ साथ छोड़ देंगे,
हम दोस्ती करते हैं पानी और मछली की तरह,
जुदा करना चाहे कोई तो हम दम तोड़ देंगे …
लोग कहते हैं किसी एक के चले जाने से जिन्दगी अधूरी नहीं होती,
लेकिन लाखों के मिल जाने से उस एक की कमी पूरी नहीं होती है
हमारी किसी बात से खफा मत होना,
नादानी से हमारी नाराज़ मत होना.
पहली बार चाहा है हमने किसी को इतना,
चाह कर भी कभी हमसे दूर मत होना..
दुआ करते हैं हम सर झुका के,
आप अपनी मंज़िल को पाए.
अगर आपकी राहों मे कभी अंधेरा आए,
तो रोशनी के लिए खुदा हमको जलाए…
मुद्दत के बाद उसनें की , जो लुत्फ की निगाह ।
दिल खुश तो हो गया, मगर आंसू निकल पड़े ।।
Sunday, 11 August 2013
मैं तो आइना हूँ,
मिलना इत्तिफाक था, बिछड़ना नसीब था;
वो उतना ही दूर चला गया जितना वो करीब था;
हम उसको देखने क लिए तरसते रहे;
जिस शख्स की हथेली पे हमारा नसीब था।
समझा ना कोई दिल की बात को;
दर्द दुनिया ने बिना सोचे ही दे दिया;
जो सह गए हर दर्द को हम चुपके से;
तो हमको ही पत्थर दिल कह दिया।
बिन बात के ही रूठने की आदत है;
किसी अपने का साथ पाने की चाहत है;
आप खुश रहें, मेरा क्या है;
मैं तो आइना हूँ, मुझे तो टूटने की आदत है।
लिखूं कुछ आज यह वक़्त का तकाजा है;
मेरे दिल का दर्द अभी ताजा-ताजा है;
गिर पड़ते हैं मेरे आंसू मेरे ही कागज पर;
लगता है कि कलम में स्याही का दर्द ज्यादा है!
दर्द से दोस्ती हो गई यारो;
जिंदगी बेदर्द हो गई यारो;
क्या हुआ, जो जल गया आशियाना हमारा;
दूर तक रोशनी तो हो गई यारो!
कितना दर्द है दिल में दिखाया नहीं जाता;
गंभीर है किस्सा सुनाया नहीं जाता;
एक बार जी भर के देख लो इस चहेरे को;
क्योंकि बार-बार कफ़न उठाया नहीं जाता!
उल्फत में अक्सर ऐसा होता है;
आँखे हंसती हैं और दिल रोता है;
मानते हो तुम जिसे मंजिल अपनी;
हमसफर उनका कोई और होता है!
जब भी करीब आता हूँ बताने के किये;
जिंदगी दूर रखती हैं सताने के लिये!
महफ़िलों की शान न समझना मुझे;
मैं तो अक्सर हँसता हूँ गम छुपाने के लिये!
वो अपने फायदे की खातिर फिर आ मिले थे हमसे;
हम नादाँ समझे कि हमारी दुआओं में असर बहुत है!
क़दम क़दम पर सिसकी और क़दम क़दम पर आहें;
खिजाँ की बात न पूछो सावन ने भी तड़पाया मुझे!
इस दिल की दास्ताँ भी बड़ी अजीब होती है;
बड़ी मुस्किल से इसे ख़ुशी नसीब होती है;
किसी के पास आने पर ख़ुशी हो न हो;
पर दूर जाने पर बड़ी तकलीफ होती है!
पास आकर सभी दूर चले जाते हैं;
अकेले थे हम, अकेले ही रह जाते हैं;
इस दिल का दर्द दिखाएँ किसे;
मल्हम लगाने वाले ही जखम दे जाते हैं!
किसी के दिल का दर्द किसने देखा है;
देखा है, तो सिर्फ चेहरा देखा है;
दर्द तो तन्हाई मे होता है;
लेकिन तन्हाइयो मे लोगों ने हमे हँसते हुए देखा है!
'चाहत';
अभी सूरज नहीं डूबा ज़रा सी शाम होने दो;
मैं खुद लौट जाउंगा मुझे नाकाम होने दो;
मुझे बदनाम करने का बहाना ढूँढ़ते हो क्यों;
मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले नाम होने दो!
बहुत ही तल्ख़ तजुर्बे का नाम है 'चाहत';
जो तुमको अच्छा लगे, बस उससे प्यार मत करना।
मेरी बर्बादी पर तू कोई मलाल ना करना;
भूल जाना मेरा ख्याल ना करना;
हम तेरी ख़ुशी के लिए कफ़न ओढ़ लेंगे;
पर तुम मेरी लाश ले कोई सवाल मत करना!
न कोई इलज़ाम न कोई तंज़, न कोई रुसवाई मीर;
दिन बहुत हो गए यारों ने कोई इनायत नहीं की!
उल्फत का अक्सर यही दस्तूर होता है;
जिसे चाहो वही अपने से दूर होता है;
दिल टूटकर बिखरता है इस कदर;
जैसे कोई कांच का खिलौना चूर-चूर होता है!
आप गैरों की बात करते हैं हमने अपने भी आजमायें हैं;
लोग कांटो से बच के चलते हैं, हमनें फूलों से ज़ख्म खाए हैं!
अपने सीने से लगाए हुए उम्मीद की लाश;
मुद्दतों जीस्त को नाशाद किया है मैंने;
तूने तो एक ही सदमे से किया था दो-चार;
दिल को हर तरह से बर्बाद किया है मैंने!
हर दिल में दर्द छुपा होता है, बस बयान करने का अंदाज़ जुदा होता है;
कुछ लोग आँखों से दर्द बहा लेते हैं और किसी की हंसी में भी दर्द छुपा होता है!
अब नींद से कहो हम से सुलह कर ले
वो दौर चला गया जिसके लिए हम जागा करते थे!
वो तो अपने दर्द रो-रो के सुनते रहे;
हमारी तन्हाइयों से आँख चुराते रहे;
और हमें बेवफा का नाम मिला क्योंकि;
हम हर दर्द मुस्कुरा कर छुपाते रहे!
ज़ख़्म जब मेरे सीने के भर जाएँगे;
आँसू भी मोती बनकर बिखर जाएँगे;
ये मत पूछना किस किस ने धोखा दिया;
वरना कुछ अपनो के चेहरे उतर जाएँगे।
बीते हुए कुछ दिन ऐसे हैं;
तन्हाई जिन्हें दोहराती है;
रो-रो के गुजरती हैं रातें;
आंखों में सहर हो जाती है!
गुलाब तो टूट कर बिखर जाता है;
पर खुशबु हवा में बरकरार रहती है;
जाने वाले तो छोड़ के चले जाते हैं;
पर एहसास तो दिलों में बरकरार रहते हैं।
दर्द ही सही मेरे इश्क का इनाम तो आया;
खाली ही सही हाथों में जाम तो आया;
मैं हूँ बेवफ़ा सबको बताया उसने;
यूँ ही सही, उसके लबों पे मेरा नाम तो आया।
दर्द अगर काजल होता तो आँखों में लगा लेते;
दर्द अगर आँचल होता तो अपने सर पर सजा लेते;
दर्द अगर समुंदर होता तो दिल को हम साहिल बना लेते;
और दर्द अगर तेरी मोहब्बत होती तो उसको चाहत-ऐ ला हासिल बना लेते।
हमनें जब किया दर्द-ए-दिल बयां, तो शेर बन गया;
लोगों ने सुना तो वाह वाह किया, दर्द और बढ़ गया;
मोहब्बत की पाक रूह मेरे साँसों में है;
ख़त लिखा जब गम कम करने के लिए तो गम और बढ़ गया।
शायद कि इधर आके कोई लौट गया है;
बेताबी से यूं मुंह को कलेजा नहीं आता।
जुबां पर जब किसी के दर्द का अफ़साना आता है;
हमें रह-रह कर अपना दिल-ए-दीवाना आता है।
मैं खुद लौट जाउंगा मुझे नाकाम होने दो;
मुझे बदनाम करने का बहाना ढूँढ़ते हो क्यों;
मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले नाम होने दो!
बहुत ही तल्ख़ तजुर्बे का नाम है 'चाहत';
जो तुमको अच्छा लगे, बस उससे प्यार मत करना।
मेरी बर्बादी पर तू कोई मलाल ना करना;
भूल जाना मेरा ख्याल ना करना;
हम तेरी ख़ुशी के लिए कफ़न ओढ़ लेंगे;
पर तुम मेरी लाश ले कोई सवाल मत करना!
न कोई इलज़ाम न कोई तंज़, न कोई रुसवाई मीर;
दिन बहुत हो गए यारों ने कोई इनायत नहीं की!
उल्फत का अक्सर यही दस्तूर होता है;
जिसे चाहो वही अपने से दूर होता है;
दिल टूटकर बिखरता है इस कदर;
जैसे कोई कांच का खिलौना चूर-चूर होता है!
आप गैरों की बात करते हैं हमने अपने भी आजमायें हैं;
लोग कांटो से बच के चलते हैं, हमनें फूलों से ज़ख्म खाए हैं!
अपने सीने से लगाए हुए उम्मीद की लाश;
मुद्दतों जीस्त को नाशाद किया है मैंने;
तूने तो एक ही सदमे से किया था दो-चार;
दिल को हर तरह से बर्बाद किया है मैंने!
हर दिल में दर्द छुपा होता है, बस बयान करने का अंदाज़ जुदा होता है;
कुछ लोग आँखों से दर्द बहा लेते हैं और किसी की हंसी में भी दर्द छुपा होता है!
अब नींद से कहो हम से सुलह कर ले
वो दौर चला गया जिसके लिए हम जागा करते थे!
वो तो अपने दर्द रो-रो के सुनते रहे;
हमारी तन्हाइयों से आँख चुराते रहे;
और हमें बेवफा का नाम मिला क्योंकि;
हम हर दर्द मुस्कुरा कर छुपाते रहे!
ज़ख़्म जब मेरे सीने के भर जाएँगे;
आँसू भी मोती बनकर बिखर जाएँगे;
ये मत पूछना किस किस ने धोखा दिया;
वरना कुछ अपनो के चेहरे उतर जाएँगे।
बीते हुए कुछ दिन ऐसे हैं;
तन्हाई जिन्हें दोहराती है;
रो-रो के गुजरती हैं रातें;
आंखों में सहर हो जाती है!
गुलाब तो टूट कर बिखर जाता है;
पर खुशबु हवा में बरकरार रहती है;
जाने वाले तो छोड़ के चले जाते हैं;
पर एहसास तो दिलों में बरकरार रहते हैं।
दर्द ही सही मेरे इश्क का इनाम तो आया;
खाली ही सही हाथों में जाम तो आया;
मैं हूँ बेवफ़ा सबको बताया उसने;
यूँ ही सही, उसके लबों पे मेरा नाम तो आया।
दर्द अगर काजल होता तो आँखों में लगा लेते;
दर्द अगर आँचल होता तो अपने सर पर सजा लेते;
दर्द अगर समुंदर होता तो दिल को हम साहिल बना लेते;
और दर्द अगर तेरी मोहब्बत होती तो उसको चाहत-ऐ ला हासिल बना लेते।
हमनें जब किया दर्द-ए-दिल बयां, तो शेर बन गया;
लोगों ने सुना तो वाह वाह किया, दर्द और बढ़ गया;
मोहब्बत की पाक रूह मेरे साँसों में है;
ख़त लिखा जब गम कम करने के लिए तो गम और बढ़ गया।
शायद कि इधर आके कोई लौट गया है;
बेताबी से यूं मुंह को कलेजा नहीं आता।
जुबां पर जब किसी के दर्द का अफ़साना आता है;
हमें रह-रह कर अपना दिल-ए-दीवाना आता है।
जुदाई
अकेला सा महसूस करो जब तन्हाई में;
याद मेरी आये जब जुदाई में;
महसूस करना तुम्हारे करीब हूँ मैं;
जब चाहे देख लेना अपनी ही परछाई में!
वो रोए तो बहुत पर मुझसे मुंह मोड़कर रोए;
कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़कर रोए;
मेरे सामने कर दिए मेरे तस्वीर के टुकड़े;
पता चला मेरे पीछे वो उन्हें जोड़कर रोए!
दुआ करना यारों जुदा हो रहे हैं;
रही जिंदगी तो फिर आकर मिलेंगे;
अगर मर गया तो दुआ करते रहना;
आंसू बहाने की कोशिश ना करना!
सदियों से जागी आँखों को एक बार सुलाने आ जाओ;
माना कि तुमको प्यार नहीं, नफ़रत ही जताने आ जाओ;
जिस मोड़ पे हमको छोड़ गए हम बैठे अब तक सोच रहे;
क्या भूल हुई क्यों जुदा हुए, बस यह समझाने आ जाओ।
हौंसला तो तुझमे भी ना था मुझसे जुदा होने का;
वर्ना काजल तेरी आँखों का यूँ फैला नहीं होता!
मोहब्बत-मोहब्बत की बस इतनी कहानी है;
इक टूटी हुई कश्ती और ठहरा हुआ पानी है;
इक फूल जो किताबों में कहीं दम तोड़ चुका है;
कुछ याद नहीं आता किसकी निशानी है!
याद मेरी आये जब जुदाई में;
महसूस करना तुम्हारे करीब हूँ मैं;
जब चाहे देख लेना अपनी ही परछाई में!
वो रोए तो बहुत पर मुझसे मुंह मोड़कर रोए;
कोई मजबूरी होगी तो दिल तोड़कर रोए;
मेरे सामने कर दिए मेरे तस्वीर के टुकड़े;
पता चला मेरे पीछे वो उन्हें जोड़कर रोए!
दुआ करना यारों जुदा हो रहे हैं;
रही जिंदगी तो फिर आकर मिलेंगे;
अगर मर गया तो दुआ करते रहना;
आंसू बहाने की कोशिश ना करना!
सदियों से जागी आँखों को एक बार सुलाने आ जाओ;
माना कि तुमको प्यार नहीं, नफ़रत ही जताने आ जाओ;
जिस मोड़ पे हमको छोड़ गए हम बैठे अब तक सोच रहे;
क्या भूल हुई क्यों जुदा हुए, बस यह समझाने आ जाओ।
हौंसला तो तुझमे भी ना था मुझसे जुदा होने का;
वर्ना काजल तेरी आँखों का यूँ फैला नहीं होता!
मोहब्बत-मोहब्बत की बस इतनी कहानी है;
इक टूटी हुई कश्ती और ठहरा हुआ पानी है;
इक फूल जो किताबों में कहीं दम तोड़ चुका है;
कुछ याद नहीं आता किसकी निशानी है!
Thursday, 8 August 2013
आईए जिन्दगी का स्वागत करें।
कब्र से मिटटी उठा ले गया कोई,
इसी बहाने हमें छू गया कोई,
तन्हाई और अँधेरे में खुश थे हम,
अब फिर इंतज़ार की वजह दे गया कोई||
ज़रा सी रंजिश पे ना छोड़ना दामन वफ़ा का कभी,
उम्रें बीत जाती हैं, दिल का रिश्ता बनाने में||
वक्त के पन्ने पलटकर
फ़िर वो हसीं लम्हे जीने को दिल चाहता है
कभी मुशाकराते थे सभी दोस्त मिलकर
अब उन्हें साथ देखने को दिल तरस जाता है
ज़िन्दगी का हर राज़ तन्हाई में पा लिया,
जिस का भी गम मिला अपना बना लिया|
अपना दर्द सुनने को जब कोई न मिला,
तो रखा आइना और खुद को ही सुना लिया||
ज़रा नाज़ुक है दिल, अहिस्ता अहिस्ता संभालो|
है मिटटी का खिलौना, यूँ न हो कि तोड़ डालो||
आइने से अहिस्ता से
नज़रों से परछाई से
अपने आप को बहुत बार गुम पाया हैं
आईने में आज खुद को देख ये गुमान होने लगा,
क्या ये मैं ही हूँ या पहचान खोने लगा,
दिल तड़पता था अंदर ही अंदर, अँधेरे में छुपकर रोता था,
तब जाके जाना दिल लगाने का क्या अंजाम होता था...
याद आती नहीं उनको मेरी, कोई गम नहीं,
याद करते है कितना, उनको कोई भरम नहीं,
अब तो हाल-इ-दिल पूछना भी, न-मुनासिब समझते है वो,
लगता है जैसे, उनको अपना कोई गम नहीं...
मुझको तन्हाई में भी, लोगो की आवाज़ सुनाई देती है,
मुझको अंधेरों में भी, खुद की परछाई दिखाई देती है,
बदल रहा हूँ मैं शायद, यह एहसास होने लगा है,
मुझको मेरी राहों में, तन्हाई दिखाई देती है...
आपका खुश रहना ही आपके
दुश्मनो के लिय
सबसे बडी सजा है
इसी बहाने हमें छू गया कोई,
तन्हाई और अँधेरे में खुश थे हम,
अब फिर इंतज़ार की वजह दे गया कोई||
ज़रा सी रंजिश पे ना छोड़ना दामन वफ़ा का कभी,
उम्रें बीत जाती हैं, दिल का रिश्ता बनाने में||
वक्त के पन्ने पलटकर
फ़िर वो हसीं लम्हे जीने को दिल चाहता है
कभी मुशाकराते थे सभी दोस्त मिलकर
अब उन्हें साथ देखने को दिल तरस जाता है
ज़िन्दगी का हर राज़ तन्हाई में पा लिया,
जिस का भी गम मिला अपना बना लिया|
अपना दर्द सुनने को जब कोई न मिला,
तो रखा आइना और खुद को ही सुना लिया||
ज़रा नाज़ुक है दिल, अहिस्ता अहिस्ता संभालो|
है मिटटी का खिलौना, यूँ न हो कि तोड़ डालो||
आइने से अहिस्ता से
नज़रों से परछाई से
अपने आप को बहुत बार गुम पाया हैं
आईने में आज खुद को देख ये गुमान होने लगा,
क्या ये मैं ही हूँ या पहचान खोने लगा,
दिल तड़पता था अंदर ही अंदर, अँधेरे में छुपकर रोता था,
तब जाके जाना दिल लगाने का क्या अंजाम होता था...
याद आती नहीं उनको मेरी, कोई गम नहीं,
याद करते है कितना, उनको कोई भरम नहीं,
अब तो हाल-इ-दिल पूछना भी, न-मुनासिब समझते है वो,
लगता है जैसे, उनको अपना कोई गम नहीं...
मुझको तन्हाई में भी, लोगो की आवाज़ सुनाई देती है,
मुझको अंधेरों में भी, खुद की परछाई दिखाई देती है,
बदल रहा हूँ मैं शायद, यह एहसास होने लगा है,
मुझको मेरी राहों में, तन्हाई दिखाई देती है...
आपका खुश रहना ही आपके
दुश्मनो के लिय
सबसे बडी सजा है
ऐतबार
वादों पर ऐतबार किसको है, मोहब्बत से इनकार किसको है,
कुछ तो मजबूरियां रहती है हर किसी की, वरना तन्हाईयों से प्यार किसको है.
इंतज़ार हैं !
कल तक तनहा थे आज इंतज़ार हैं !
कल तक कुछ नहीं न था आज ऐतबार करते हैं !!
यूँही आपको हिचकीयाँ नहीं आती.....!
हम याद ही आपको बार - बार करते हैं !!
चाहे वफ़ा में ठोकरे खाते रहो !
फिर भी रस्म-ऐ-वफ़ा निभाते रहो !!
यही तो इश्क का दस्तूर हैं !
ज़ख्म खाओ फिर भी मुस्कुराते रहे !!
क्या करूँगा उसका इंतज़ार करके !
जब चली गई वो मुझे बर्बाद करके !!
सोचा था अपना भी एक जहाँ होगा !
मगर मिली सिर्फ तन्हाई उसे प्यार करके !!
दोस्ती हर चेहरे की मुस्कान होती हैं !
दोस्ती सुख - दुःख की पहचान होती हैं !!
कोई रूठ जाए तो दिल पे मत लेना !
क्योकि दोस्ती ज़रासी नादान होती हैं !!
किसी को प्यार इतना देना की हद न रहे !
पर ऐतबार भी इतना करना की शक न रहे !!
वफ़ा इतना करना की बेवफाई न रहे !
और दुवा इतना करना की जुदाई न रहे !!
कल तक कुछ नहीं न था आज ऐतबार करते हैं !!
यूँही आपको हिचकीयाँ नहीं आती.....!
हम याद ही आपको बार - बार करते हैं !!
चाहे वफ़ा में ठोकरे खाते रहो !
फिर भी रस्म-ऐ-वफ़ा निभाते रहो !!
यही तो इश्क का दस्तूर हैं !
ज़ख्म खाओ फिर भी मुस्कुराते रहे !!
क्या करूँगा उसका इंतज़ार करके !
जब चली गई वो मुझे बर्बाद करके !!
सोचा था अपना भी एक जहाँ होगा !
मगर मिली सिर्फ तन्हाई उसे प्यार करके !!
दोस्ती हर चेहरे की मुस्कान होती हैं !
दोस्ती सुख - दुःख की पहचान होती हैं !!
कोई रूठ जाए तो दिल पे मत लेना !
क्योकि दोस्ती ज़रासी नादान होती हैं !!
किसी को प्यार इतना देना की हद न रहे !
पर ऐतबार भी इतना करना की शक न रहे !!
वफ़ा इतना करना की बेवफाई न रहे !
और दुवा इतना करना की जुदाई न रहे !!
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